
11 January 2026
तारकासुर का जन्म व उसका तप - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 14
Shiv Puran Katha in Hindi
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शिव पुराण का पंद्रहवाँ अध्याय तारकासुर के जन्म, उसके भयानक तप और देवताओं पर उसके बढ़ते अत्याचार का विस्तृत वर्णन करता है। इस अध्याय में बताया गया है कि कैसे कठोर तपस्या से तारकासुर ने अपार शक्तियाँ प्राप्त कीं, देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया और सम्पूर्ण त्रिलोक भयभीत हो उठा।
यह अध्याय अहंकार, शक्ति और तप के दुरुपयोग के गहरे आध्यात्मिक संदेश को उजागर करता है तथा यह दर्शाता है कि अधर्म का अंत निश्चित है। शिव पुराण का यह अध्याय भक्तों को धर्म, संयम और शिव तत्व के महत्व का बोध कराता है।
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