
कामदेव का भस्म होना - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 18
Shiv Puran Katha in Hindi
शिव पुराण का अठारहवाँ अध्याय एक अत्यंत मार्मिक और दिव्य प्रसंग प्रस्तुत करता है, जिसमें कामदेव भगवान शिव को मोहित करने के प्रयास में उनके तीसरे नेत्र की अग्नि से भस्म हो जाते हैं। इस अध्याय में भगवान शिव की कठोर तपस्या, कामदेव द्वारा चलाए गए बाणों का निष्फल होना, रति का विलाप तथा देवताओं की करुण प्रार्थना का विस्तार से वर्णन मिलता है। यह कथा वैराग्य, संयम, तपस्या और अहंकार के नाश का गहरा आध्यात्मिक संदेश देती है। शिव पुराण का यह अध्याय बताता है कि ब्रह्मांड की शक्तियाँ भी भगवान शिव की इच्छा और तप के सामने क्षीण हैं। कामदेव का भस्म होना केवल विनाश नहीं, बल्कि धर्म और संतुलन की स्थापना का प्रतीक है।
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