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विश्वास । आभा बोधिसत्व
मैंने अपने सिर पर
जो विश्वास की दीवार खड़ी की
वहाँ यही लिखा बार-बार
दुख बहुत छोटा है
ख़ुशी बहुत बड़ी
छोटे और बड़े के फ़र्क़
को जीना ही सागर
बन जाना है एक दिन
बूँद-बूँद
जुड़ कर विश्व

विश्वास । आभा बोधिसत्व
मैंने अपने सिर पर
जो विश्वास की दीवार खड़ी की
वहाँ यही लिखा बार-बार
दुख बहुत छोटा है
ख़ुशी बहुत बड़ी
छोटे और बड़े के फ़र्क़
को जीना ही सागर
बन जाना है एक दिन
बूँद-बूँद
जुड़ कर विश्व