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Tabla | Vivek Nirala
27 September 2026

Tabla | Vivek Nirala

Pratidin Ek Kavita

About

तबला ।  विवेक निराला

 

किसी की खाल है

जो खींच कर मढ़ दी गई है

मढ़ी हुई है मृतक

की जीवन्त भाषा।


मृतक के परिजनों

का विलाप कस गया है

इस खाल के साथ।


वादक की फूँक से नहीं

खाल के मालिक की

आख़िरी साँस से

बज रही है वह बाँसुरी

जो सँगत पर है।


धा-धा-धिन-धा

और तिरकिट

के पीछे

एक विषादी स्वर है।