About
प्रेम के बारे में । सविता सिंह
सिल्विया प्लाथ आओ
मेरी आत्मा में बसो
निश्चिंतता महसूस करो
यहाँ अकेलापन कोई यातना नहीं
जो ले जाए तुम्हें गैस स्टोव तक
नहीं प्रेम के बदले नहीं मिला प्रेम कोई महादुख
यहाँ जीवन की हल्की रोशनी में फूलों की तरह खिली हुई
मिलेंगी जीवन जीने की अमूल्य सलाहें अब
एक फूल जिनमें से तुम्हें भी जीवित करेगा
अपनी अद्भुत सुगंध से
आओ सिल्विया प्लाथ
मुझमें बसो
निश्चिंतता महसूस करो
यहाँ दूर-दूर तक कोई पुरुष तुम्हें
इतना बेबस नहीं कर सकेगा अपनी क्रूरता से
कि तुम नष्ट हो जाओ
अपने प्रेम से नहीं मार सकेगा वह तुम्हें दोबारा
आओ और अपनी बाक़ी कविताएँ लिखो
बताओ वह कैसी उदासी थी जिसे तुम झेल नहीं पाईं
डूब गई जिसमें अंततः
और यह भी कि अंत तक लगाते हुए आख़िरी ग़ोता
क्या सोचा था तुमने प्रेम के बारे में