Pankh Diye Aakash Na Doge | Kanhaiyalal Sethia
26 March 2026

Pankh Diye Aakash Na Doge | Kanhaiyalal Sethia

Pratidin Ek Kavita

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पंख दिए आकाश न दोगे | कन्हैयालाल सेठिया


पंख दिए, आकाश न दोगे?

तो जड़ता चेतनता क्या है?

फिर क्षमता-दर्बलता क्या है?

केवल खेल, अगर रचना को-

प्राण दिए, विश्वास न दोगे!

व्यर्थ मृत्यु-जीवन की रेखा,

निष्फल है कटु-मधु का लेखा,

केवल कपट, अगर कोयल को-

कंठ दिए, मधुमास न दोगे!

हृदय-हीन की भाषा कैसी?

मिलन-हीन अभिलाषा कैसी?

कैवल व्यंग्य, अगर लोचन को-

स्वप्न दिए, आभास न दोगे?

पंख दिए, आकाश न दोगे?