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ओ शहर! | जसिंता केरकेट्टा
भागते हुए छोड़कर अपना घर
पुआल, मिट्टी और खपरे
पूछते हैं अक्सर
ओ शहर!
क्या तुम कभी उजड़ते हो
किसी विकास के नाम पर?
ओ शहर! | जसिंता केरकेट्टा
भागते हुए छोड़कर अपना घर
पुआल, मिट्टी और खपरे
पूछते हैं अक्सर
ओ शहर!
क्या तुम कभी उजड़ते हो
किसी विकास के नाम पर?