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Mustanda Aur Bachcha | Shubha
30 July 2026

Mustanda Aur Bachcha | Shubha

Pratidin Ek Kavita

About

मुस्टंडा और बच्चा।  शुभा


भाषा के अंदर बहुत सी बातें

सबने मिलकर बनाई होती हैं


इसलिए भाषा बहुत समय

एक विश्वास की तरह चलती है


जैसे हम अगर कहें बच्चा

तो सभी समझते हैं, हाँ बच्चा


लेकिन बच्चे की जगह बैठा होता है

एक परजीवी


एक तानाशाह

फिर भी हम कहते रहते हैं—


बच्चा! ओहो बच्चा!

और पूरा देश मुस्टंडों से भर जाता है


किसी उजड़े हुए बूढ़े में

किसी ठगी गई औरत में


किसी गूँगे में जैसे किसी स्मृति में

छिपकर जान बचाता है बच्चा


अब मुस्टंडा भी है और बच्चा भी है

इन्हें अलग-अलग पहचानने वाला भी है


भाषा अब भी है विश्वास की तरह अकारथ