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मैं देख रहा हूँ । अज्ञेय
मैं देख रहा हूँ
झरी फूल से पँखुरी
- मैं देख रहा हूँ अपने को ही झरते।
मैं चुप हूँ :
वह मेरे भीतर वसंत गाता है।
मैं देख रहा हूँ । अज्ञेय
मैं देख रहा हूँ
झरी फूल से पँखुरी
- मैं देख रहा हूँ अपने को ही झरते।
मैं चुप हूँ :
वह मेरे भीतर वसंत गाता है।