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Kya Wo Din Bhi Din Hain | Rahi Masoom Raza
01 September 2026

Kya Wo Din Bhi Din Hain | Rahi Masoom Raza

Pratidin Ek Kavita

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क्‍या वो दिन भी दिन हैं  | राही मासूम रज़ा


क्‍या वो दिन भी दिन हैं जिनमें दिन भर जी घबराए

क्‍या वो रातें भी रातें हैं जिनमें नींद ना आए।


हम भी कैसे दीवाने हैं किन लोगों में बैठे हैं

जान पे खेलके जब सच बोलें तब झूठे कहलाए।


इतने शोर में दिल से बातें करना है नामुमकिन

जाने क्‍या बातें करते हैं आपस में हमसाए।।


हम भी हैं बनवास में लेकिन राम नहीं हैं राही

आए अब समझाकर हमको कोई घर ले जाए ।।