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Kuch Sacchaiyaan Kuch Jhooth | Wazda Khan
31 July 2026

Kuch Sacchaiyaan Kuch Jhooth | Wazda Khan

Pratidin Ek Kavita

About

कुछ सच्चाईयां, कुछ झूठ ।  वाज़दा खान 

 

केवल मिसाइलें ही गहरे

मारक असर नहीं करतीं

जीवन में और भी बहुत कुछ है 

गहरा और असरदार


कभी उतरो जो उन गहराइयों में

जहां बेहद अन्धेरा है

कहीं है चिड़िया की एक आवाज़

कहीं चट्टानों के बीच दबा कोई रंग

कहीं दरारों में बिंधा रुदन


निश्चित रूप से हर असर

गहरा अन्धेरा नहीं होता

मगर जो गहरा और असरदार है उनमें से

कुछ सितारों के साथ, तो कुछ

दूसरे ग्रह के सूर्य के साथ

छप जाते हैं पानी से लेकर

उन हवाओं तक


जो पिछली सदी और उससे भी

पिछली सदी में और आज तक एक

जैसी है, पानी भी एक जैसा है

मगर कुछ है जो बदलता जा रहा है

तेज़ी से वक्त के साथ 


देख पाती हूं आंखों के भीतर

चमकती धूप में पाती हूं तब

कुछ सच्चाइयां, कुछ झूठ, कुछ गणनायें

कुछ तथ्य, बहुत सारी चुप्पियां

और तबाह कर देने वाला

इक स्याह जुनून।