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Har Baar Deewaar | Jyotsna Milan
25 July 2026

Har Baar Deewaar | Jyotsna Milan

Pratidin Ek Kavita

About

हर बार दीवार।  ज्योत्स्ना मिलन


आसमान होगा की उम्मीद में

बाहर देखती खिड़की से


बाहर

दीवार होती सामने


और होती

फाँक भर धूप


दो दीवारों के बीच धरी-सी

दीवार की जगह


आसमान नहीं निकला कभी

घास का मैदान भी नहीं


खिड़की के बाहर

हर बार


एक दीवार

आसमान के बदले।