About
हर बार दीवार। ज्योत्स्ना मिलन
आसमान होगा की उम्मीद में
बाहर देखती खिड़की से
बाहर
दीवार होती सामने
और होती
फाँक भर धूप
दो दीवारों के बीच धरी-सी
दीवार की जगह
आसमान नहीं निकला कभी
घास का मैदान भी नहीं
खिड़की के बाहर
हर बार
एक दीवार
आसमान के बदले।
हर बार दीवार। ज्योत्स्ना मिलन
आसमान होगा की उम्मीद में
बाहर देखती खिड़की से
बाहर
दीवार होती सामने
और होती
फाँक भर धूप
दो दीवारों के बीच धरी-सी
दीवार की जगह
आसमान नहीं निकला कभी
घास का मैदान भी नहीं
खिड़की के बाहर
हर बार
एक दीवार
आसमान के बदले।