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आइए जानते हैं कि किस प्रकार जया किशोरी जी ने अपने विचारों द्वारा कर्म को महत्व दिया है और कोई काम छोटा नहीं होता इस तथ्य को कैसे समझाया हैं जहां एक सुई का कम होता हैं वहां तलवार कम नहीं आती हैं और समाज में अपने जीवन साथी, परिवार, मित्र या मां बाप कोई भी सब का अपना एक स्थान होता हैं सबका अपना -अपना प्रयास होता हैं बलिदान होता किसी को जज नहीं करना चाहिए ।