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जया किशोरी जी ने बताया है कि किस प्रकार कर्म करते रहना चाहिए। कर्म का मतलब पूजा पाठ, नाम जप, बुजुर्गों की सेवा,अपने घर को संवारना, बच्चों की परवरिश ओर जीव जंतुओं की रक्षा अन्य उदाहरणों द्वारा कर्म को व्यक्त किया हैं आइए विस्तार से जानते हैं जया किशोरी जी द्वारा।